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अभूतपूर्व ठंड की चपेट में जम्मू, कश्मीर में गहरी शीतलहर से जनजीवन प्रभावित

जम्मू और कश्मीर में अभूतपूर्व ठंड जारी है। तापमान रिकॉर्ड स्तर तक गिरा है, जबकि चिल्लई कलां के बीच घाटी के मैदानी इलाकों में अब तक पहली बर्फबारी नहीं हुई।

जम्मू और कश्मीर में भीषण ठंड का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहाड़ों से मैदानों की ओर बह रही सर्द हवाओं के साथ कश्मीर में कड़ाके की ठंड जारी है, वहीं जम्मू शहर भी अभूतपूर्व शीत परिस्थितियों से जूझ रहा है। गुरुवार को भी पूरे क्षेत्र में ठंड का असर स्पष्ट रूप से देखा गया।

बुधवार को जम्मू शहर में अधिकतम तापमान मात्र 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुरुवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 4.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच केवल तीन डिग्री का अंतर होने से ठंड का असर और भी अधिक महसूस किया जा रहा है। लगातार छाए कोहरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को जम्मू में दर्ज किया गया अधिकतम तापमान अब तक का चौथा सबसे कम तापमान रहा। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 1986 में अधिकतम तापमान 5 डिग्री, 2013 में 6.7 डिग्री और 2016 में 7.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

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कश्मीर घाटी में भी तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 3.9 डिग्री, गुलमर्ग में माइनस 3.2 और पहलगाम में 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू संभाग में कटरा में 6.8, बटोटे में 4.9, बनिहाल में 1.9 और भद्रवाह में माइनस 0.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 16 जनवरी को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण जम्मू-कश्मीर में बारिश और बर्फबारी की संभावना है, जिसके बाद लगातार दो और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनके प्रभाव से घाटी के मैदानी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी होने की उम्मीद है।

अब तक घाटी के मैदानी क्षेत्रों में उल्लेखनीय बर्फबारी नहीं हुई है, जिससे चिंता बढ़ गई है। ‘चिल्लई कलां’ के नाम से जाने जाने वाले 40 दिनों के कठोर शीतकालीन दौर में भारी बर्फबारी जल स्रोतों, कृषि और बागवानी के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। यह अवधि आधे से अधिक गुजर चुकी है और 30 जनवरी को समाप्त होगी। फरवरी और मार्च की बर्फबारी से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि वह जल्दी पिघल जाती है।

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