जन विश्वास विधेयक 2026 को संसद की मंजूरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले—ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा
जन विश्वास विधेयक 2026 संसद से पारित हुआ। पीएम मोदी ने इसे ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए बड़ा कदम बताया, जिससे छोटे अपराधों का बोझ कम होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को संसद से मंजूरी मिलने पर इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश में “विश्वास आधारित ढांचे” को मजबूत करेगा और ‘ईज ऑफ लिविंग’ तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों का अंत होगा। उन्होंने कहा कि इससे मामलों का तेजी से निपटारा होगा और अपराधों को गैर-अपराध की श्रेणी में लाने से मुकदमों का बोझ कम होगा।
यह विधेयक राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ, जबकि इससे पहले लोकसभा इसे मंजूरी दे चुकी थी। इस कानून के तहत 57 प्रावधानों में जेल की सजा खत्म करने और 158 प्रावधानों में जुर्माना हटाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 17 प्रावधानों में सजा कम करने और 113 प्रावधानों में जेल व जुर्माने को बदलकर केवल आर्थिक दंड करने की व्यवस्था की गई है।
जन विश्वास विधेयक में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम 1994, मोटर वाहन अधिनियम 1988, आरबीआई अधिनियम 1934, बीमा कानून और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है।
इस विधेयक का उद्देश्य छोटे-मोटे अपराधों को गैर-अपराध की श्रेणी में लाकर व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम करना और नागरिकों के जीवन को आसान बनाना है। इसके तहत पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी और बार-बार उल्लंघन पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था की गई है।
यह कानून 79 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन कर देश के नियामक ढांचे को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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