पूरा परिवार उजड़ गया: झारखंड में 20 लोगों की जान लेने वाले हाथी की तलाश की कहानी
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में एक हिंसक हाथी के हमलों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। गांवों में दहशत है और पीड़ित परिवारों का जीवन पूरी तरह बिखर गया है।
झारखंड में एक हिंसक हाथी के आतंक ने कई परिवारों की ज़िंदगी तबाह कर दी है। अब तक इस हाथी के हमलों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले के बेनीसागर गांव में भय और शोक का माहौल है। लोग समूहों में बाहर निकल रहे हैं, गांवों में निगरानी दल बनाए गए हैं और हाथी को दूर रखने के लिए टॉर्च और पटाखों का सहारा लिया जा रहा है। वहीं वन अधिकारी इस नर हाथी की “असामान्य आक्रामकता” के कारण अंधेरे में तीर चला रहे हैं।
रांची से करीब 230 किलोमीटर दूर स्थित बेनीसागर गांव में संजू देवी अपने घर में काले शॉल में लिपटी बैठी हैं। घर में सन्नाटा पसरा है। पुरुष धान की पुआल की रस्सियों और बांस के डंडों से अर्थी बना रहे हैं। महिलाएं एक-दूसरे के पास सिमटकर बैठी हैं, मानो ढाढ़स ही नहीं बल्कि सुरक्षा भी तलाश रही हों।
घर के बीचोंबीच एक आदमी का सामान रखा है—कपड़े, जूते और अन्य निजी वस्तुएं। ये सभी संजू देवी के पति प्रकाश दास की हैं, जो जेसीबी चालक थे और पांच सदस्यों के परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। 9 जनवरी को एक बेकाबू हाथी ने उनकी जान ले ली।
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संजू देवी भारी आवाज़ में बताती हैं, “मुझे नहीं पता था कि जिस आदमी की तस्वीर हमें मिली थी—जिसका सिर शरीर से करीब 50 मीटर दूर पड़ा था—वह मेरे पति ही थे।” यह कहते हुए उनकी आंखें सूनी हो जाती हैं।
इस हाथी के हमलों ने न सिर्फ जानें ली हैं, बल्कि पूरे गांवों को दहशत में डाल दिया है। लोग रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों को घरों से बाहर निकलने से रोका जा रहा है। प्रशासन और वन विभाग हाथी को पकड़ने या उसे सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश में जुटा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि हर गुजरता दिन उनके डर को और गहरा कर रहा है।
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