झारखंड पेपर लीक मामला: हेमंत सोरेन सरकार से बातचीत के लिए प्रदर्शनकारियों ने बनाई 11 सदस्यीय टीम
झारखंड में भर्ती परीक्षा गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया है। छात्र जेपीएससी परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग कर रहे हैं।
झारखंड में कथित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने राज्य सरकार के साथ बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। यह कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से बातचीत के लिए आमंत्रण दिए जाने के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार के दरवाजे छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए खुले हैं।
जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले चल रहे आंदोलन के एक पदाधिकारी ने बताया कि सरकार के बातचीत के प्रस्ताव के जवाब में 11 सदस्यीय दल बनाया गया है। इस टीम में आठ छात्र, दो पत्रकार और एक अधिवक्ता शामिल हैं। हालांकि, पत्रकार और अधिवक्ता केवल मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे और सरकार के साथ सीधे वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे।
छात्र प्रतिनिधि करेंगे बातचीत का नेतृत्व
मंच ने स्पष्ट किया है कि बातचीत में मुख्य भूमिका छात्र प्रतिनिधियों की होगी। पत्रकारों और अधिवक्ता को छात्रों को सुझाव देने और मार्गदर्शन देने के लिए शामिल किया गया है। आंदोलनकारी शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहते हैं।
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छात्र प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह शामिल हैं।
पत्रकार प्रतिनिधियों के रूप में शंभुनाथ चौधरी और विकास वर्मा तथा कानूनी सलाहकार के रूप में अजीत कुमार को शामिल किया गया है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?
छात्र 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसके अलावा वे पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की समिति से कराने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल हो सके।
हेमंत सोरेन ने बातचीत का दिया था प्रस्ताव
इस प्रतिनिधिमंडल का गठन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने छात्रों से बातचीत करने की अपील की थी। सोरेन ने कहा था कि देशभर में पेपर लीक की घटनाएं एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं और उनकी सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने तथा समाधान निकालने के लिए तैयार है।
झारखंड में यह आंदोलन 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ था। इसके बाद इसमें हजारों सरकारी नौकरी अभ्यर्थी शामिल हो गए। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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