दुबई में फंसे झारखंड के 14 मजदूर: न वेतन मिला, पासपोर्ट जब्त, 5,000 दिरहम का जुर्माने का डर
झारखंड के 14 मजदूर दुबई में बिना वेतन, जब्त पासपोर्ट और जुर्माने की धमकी के बीच फंसे हैं। उन्होंने सरकार से मदद और स्वदेश वापसी की अपील की है।
झारखंड के 14 प्रवासी मजदूर इन दिनों दुबई में गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि उनके नियोक्ता ने न तो तयशुदा वेतन का भुगतान किया और न ही उन्हें भारत लौटने की अनुमति दी जा रही है। आरोप है कि कंपनी ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं और अब 5,000 दिरहम का जुर्माना भरने की धमकी भी दी जा रही है।
ये सभी मजदूर झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों से ताल्लुक रखते हैं। मजदूरों ने एक वीडियो संदेश भेजकर अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें भोजन और रहने की व्यवस्था करने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
हजारीबाग के रहने वाले 32 वर्षीय दीपक कुमार, जो दुबई में ट्रांसमिशन लाइन वर्कर के रूप में कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्हें भारतीय कंपनी EMC इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंपनी एलएलसी में काम दिलाने का भरोसा दिया गया था। दीपक के अनुसार, सभी 14 मजदूरों ने 1,600 दिरहम मासिक वेतन पर काम करने की सहमति दी थी। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के माध्यम से संपर्क किया गया, जो पहले कई वर्षों तक इसी कंपनी के साथ ठेकेदार के रूप में काम कर चुका था।
दीपक ने बताया कि शुरुआत में सब कुछ ठीक लगा, लेकिन काम शुरू होने के बाद उन्हें केवल करीब 1,000 दिरहम ही दिए जा रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि कम वेतन, पासपोर्ट जब्ती और वापस लौटने पर रोक ने उन्हें बेहद असुरक्षित स्थिति में डाल दिया है।
मजदूरों ने भारत सरकार और झारखंड सरकार से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और उन्हें सुरक्षित तरीके से स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रवासी श्रमिकों के शोषण का एक और गंभीर उदाहरण है, जिस पर त्वरित कूटनीतिक और कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
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