हाथी हमलों में शून्य मानव मौत सुनिश्चित करें: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश
झारखंड में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि हाथी हमलों से शून्य मानव मौत सुनिश्चित की जाए और प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा मिले।
हेमंत सोरेन ने राज्य में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जताई है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हाथियों के हमलों से एक भी मानव की मौत न हो, इसके लिए ठोस तंत्र विकसित किया जाए। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से अब तक झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष में 474 लोगों की मौत हो चुकी है।
पिछले कुछ महीनों में रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका जिलों में हाथी हमलों से करीब 27 लोगों की जान गई हैं, जिसे मुख्यमंत्री ने “गंभीर चिंता का विषय” बताया।
मुख्यमंत्री ने 14 फरवरी 2026 को वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। यह बैठक उस घटना के एक दिन बाद हुई, जब हजारीबाग जिले के एक गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित सात लोगों को कुचलकर मार डाला।
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बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी हाथी कॉरिडोर का मानचित्र तैयार करने, प्रभावित गांवों में लोगों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षित ग्रामीणों को हाथी बचाव दल में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाथियों को ग्रामीण इलाकों में प्रवेश से रोकने के लिए व्यापक कदम उठाने होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी व्यक्ति की मौत जंगली जानवर के हमले में होती है, तो पीड़ित परिवार को 12 दिनों के भीतर पूरा मुआवजा दिया जाए। अधिकारियों को पिछले पांच वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष से हुई मौतों और दिए गए मुआवजे का पूरा डेटा प्रस्तुत करने को कहा गया है।
वन विभाग ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए 70 टीमें तैनात की गई हैं और छह प्रशिक्षित ‘कुमकी’ हाथियों को राज्य में लाया जा रहा है। हाल के महीनों में संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें पश्चिम सिंहभूम में एक हाथी ने 20 और बोकारो में एक मादा हाथी ने पांच लोगों की जान ली।