जम्मू-कश्मीर की राजनीति में 1950 का डिक्सन प्लान फिर चर्चा में: महबूबा की मांग और बीजेपी का जम्मू कार्ड
जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग के बीच महबूबा मुफ्ती ने पीर पंजाल और चेनाब वैली को डिविजन बनाने की मांग उठाई, जिस पर बीजेपी और एनसी ने कड़ा विरोध जताया।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर पुराने विभाजन की रेखाएं उभरती दिख रही हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर जम्मू को अलग राज्य बनाए जाने की मांग के बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जम्मू क्षेत्र के पीर पंजाल और चेनाब वैली को अलग मंडलीय (डिविजनल) दर्जा देने की मांग कर दी है। इस राजनीतिक बयानबाजी के चलते 1950 के चर्चित ‘डिक्सन प्लान’ का जिक्र फिर से होने लगा है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पीर पंजाल और चेनाब वैली क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान है, जिसे ध्यान में रखते हुए इन्हें अलग मंडल बनाया जाना चाहिए। उनका यह बयान उस समय आया जब बीजेपी नेता श्याम लाल शर्मा ने जम्मू को एक अलग राज्य बनाने की मांग उठाई थी।
महबूबा की इस मांग पर सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और बीजेपी दोनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने पीडीपी प्रमुख पर “पाकिस्तान की भाषा बोलने” का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे सुझाव जम्मू-कश्मीर की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। पार्टी का कहना है कि इस तरह की मांगें क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देती हैं।
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वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ने महबूबा मुफ्ती के प्रस्ताव की तुलना 1950 के ‘डिक्सन प्लान’ से की है। एनसी नेताओं का कहना है कि डिक्सन प्लान कश्मीर विवाद के समाधान के लिए सुझाया गया एक पुराना और असफल विचार था, जिसे दोबारा जीवित करना राजनीतिक रूप से खतरनाक हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में आगामी राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय असंतोष के चलते ऐसे मुद्दे बार-बार सामने आ रहे हैं। पीर पंजाल और चेनाब वैली जैसे क्षेत्रों की पहचान और प्रशासनिक मांगें एक बार फिर केंद्र में आ गई हैं, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होती दिख रही है।
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