JNU शिक्षकों ने असहमति की आवाज़ों के साथ असमान व्यवहार पर उठाए सवाल, ABVP ने जुर्माने का विरोध किया
JNU शिक्षक संघ ने परिसर में असहमति की आवाज़ों के साथ कथित असमान व्यवहार पर सवाल उठाए। ABVP ने जुर्माने का विरोध किया। कई प्रमुख नेताओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) शिक्षक संघ ने सोमवार को परिसर में लोकतांत्रिक अधिकारों, समानता और न्याय की मांग को लेकर साबरमती टी-पॉइंट पर एकजुटता सभा आयोजित की। इस कार्यक्रम में शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर असहमति की आवाज़ों के साथ कथित तौर पर ‘असमान व्यवहार’ करने का आरोप लगाया।
2 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम के पोस्टर में शिक्षक संघ ने सवाल उठाया कि क्या परिसर में अलग-अलग विचार रखने वाले छात्रों और शिक्षकों के साथ समान व्यवहार किया जा रहा है। शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्रालय से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की भी मांग की। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी प्रकार का भेदभाव शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करता है।
इस दौरान कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी सभा को संबोधित किया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता बृंदा करात और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक ने कार्यक्रम में भाग लेकर शिक्षकों के साथ एकजुटता व्यक्त की। वक्ताओं ने विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया।
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वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कथित तौर पर लगाए गए जुर्माने और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों पर सवाल उठाए। एबीवीपी का कहना है कि प्रशासन द्वारा लगाए गए जुर्माने पारदर्शी और निष्पक्ष होने चाहिए। संगठन ने मांग की कि यदि किसी पर कार्रवाई की जाती है तो उसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक किया जाए।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और परिसर में संवाद की संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। शिक्षक संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान का मंच भी है, जहां विविध मतों का सम्मान होना चाहिए।
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