लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर न्यायिक कर्मचारियों का सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला
ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एम्प्लॉइज कॉन्फेडरेशन ने समान वेतन, समान पदनाम और बेहतर सेवा शर्तों की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई तथा राष्ट्रीय आयोग गठन की मांग की।
देशभर के न्यायिक कर्मचारियों की लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एम्प्लॉइज कॉन्फेडरेशन (एआईजेईसी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति (एनईसी) ने सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी कानूनी कदम उठाने का निर्णय लिया है। संगठन ने न्यायिक कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ और पूरे देश में एक समान पदनाम लागू करने की मांग को लेकर लंबित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग करने का फैसला किया है।
यह निर्णय नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी में राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू भाई ब्रह्मभट्ट की अध्यक्षता में आयोजित एनईसी की बैठक में लिया गया। बैठक में देशभर के न्यायिक कर्मचारियों को वेतन असमानता, वेतन संशोधन में विसंगतियां, सीमित पदोन्नति के अवसर, अपर्याप्त सेवा शर्तें तथा अन्य सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि जस्टिस शेट्टी आयोग के गठन के 23 वर्ष बाद भी न्यायिक कर्मचारियों को उसकी सिफारिशों का पूरा लाभ नहीं मिल सका है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन सिफारिशों को लागू करने के निर्देश दे चुका है। समिति ने कहा कि जब आयोग की सिफारिशें लागू होनी थीं, तब पांचवें वेतन आयोग का दौर था, लेकिन अब देश आठवें वेतन आयोग की ओर बढ़ रहा है और फिर भी न्यायिक कर्मचारियों की मूल समस्याएं अनसुलझी हैं।
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एनईसी ने न्यायिक अधिकारियों की तर्ज पर एक स्वतंत्र राष्ट्रीय न्यायिक कर्मचारी आयोग गठित करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि यह आयोग पूरे देश में समान वेतनमान, समान पदनाम, समान सेवा नियम, समान पदोन्नति नीति और समान सेवा लाभ सुनिश्चित करे।
बैठक में न्यायिक कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक तनाव, कर्मचारियों की कमी, अत्यधिक कार्यभार और कठिन कार्य परिस्थितियों पर भी चिंता जताई गई। संगठन ने हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में न्यायिक कर्मचारियों की आत्महत्या की घटनाओं को गंभीर चेतावनी बताते हुए पर्याप्त भर्ती, समयबद्ध पदोन्नति, वेतन विसंगतियों का समाधान, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की।
संगठन ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी उच्च न्यायालयों से न्यायिक कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने तथा उन्हें न्याय व्यवस्था का अभिन्न स्तंभ मानते हुए उनकी सेवा शर्तों में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने की अपील की।