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भारतीय रेलवे ने कालका मेल का नाम नेताजी एक्सप्रेस क्यों रखा? जानिए ऐतिहासिक वजह

भारतीय रेलवे ने 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कालका मेल का नाम बदलकर नेताजी एक्सप्रेस रखा, ताकि उनके स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को सम्मान दिया जा सके।

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2021 में अपनी सबसे पुरानी और लोकप्रिय ट्रेनों में से एक कालका मेल का नाम बदलकर नेताजी एक्सप्रेस कर दिया था। यह बदलाव केवल एक नाम परिवर्तन नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा गहरा ऐतिहासिक महत्व भी छिपा है। रेल मंत्रालय ने 20 जनवरी 2021 को इस नाम परिवर्तन की घोषणा की, जो 23 जनवरी 2021 से प्रभावी हुआ।

हावड़ा से कालका के बीच चलने वाली यह ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा को हरियाणा के कालका से जोड़ती है और दिल्ली होते हुए संचालित होती है। 19वीं सदी में शुरू हुई कालका मेल भारत की शुरुआती वाणिज्यिक यात्री रेल सेवाओं में शामिल रही है। वर्षों से यह ट्रेन यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय रही है और आज भी इसे भारतीय रेलवे की प्रतिष्ठित सेवाओं में गिना जाता है।

कालका मेल का नाम बदलकर नेताजी एक्सप्रेस रखने का निर्णय नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर लिया गया। नेताजी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों में से एक थे, जिनका देश की आज़ादी में अमूल्य योगदान रहा। रेलवे का उद्देश्य इस नामकरण के माध्यम से नेताजी के साहस, नेतृत्व और बलिदान को श्रद्धांजलि देना था।

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23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती होती है, और इसी दिन से ट्रेन का नया नाम लागू किया गया। इस पहल को आज़ादी के अमृत महोत्सव से पहले एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा गया।

भारतीय रेलवे समय-समय पर ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के व्यक्तित्वों के सम्मान में ट्रेनों और स्टेशनों के नाम बदलता रहा है। कालका मेल का नेताजी एक्सप्रेस बनना भी उसी परंपरा का हिस्सा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को देश के स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत से जोड़ा जा सके।

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