संसद परिसर में कल्याण बनर्जी और प्रियंका गांधी के बीच हल्की नोकझोंक, ममता बनर्जी रहीं चर्चा के केंद्र में
संसद परिसर में कल्याण बनर्जी और प्रियंका गांधी के बीच तृणमूल सांसदों के दल बदल को लेकर तीखी लेकिन हल्की-फुल्की राजनीतिक नोकझोंक हुई, जिसमें ममता बनर्जी भी चर्चा का केंद्र रहीं।
संसद के मकर द्वार के बाहर गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कल्याण बनर्जी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच हल्की-फुल्की लेकिन राजनीतिक मायनों में अहम नोकझोंक देखने को मिली। यह बातचीत उस समय हुई जब कल्याण बनर्जी, टीएमसी के 20 सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान कल्याण बनर्जी ने दल बदलने वाले 20 नेताओं की तस्वीरें हाथ में लेकर कहा, "ये वे 20 गद्दार हैं, जो अब संसद के अंदर बैठे हैं।" इस पर प्रियंका गांधी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "कुछ लोग पहले कांग्रेस छोड़कर आपकी पार्टी में गए और फिर भाजपा में चले गए।"
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का राजनीतिक आधार लगभग समाप्त हो चुका था, इसलिए उसके नेता टीएमसी में आए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस से टीएमसी में आने वाले नेता कभी कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर संसद नहीं पहुंचे। साथ ही उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी कभी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
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इसी दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी बातचीत में शामिल हुए और कहा, "तब तो आप भी कांग्रेसी ही थे।" इस पर कल्याण बनर्जी ने सहमति जताते हुए कहा, "हम भी कांग्रेसी थे।"
इसके बाद कल्याण बनर्जी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने ममता बनर्जी को किनारे नहीं किया होता, तो आज उसकी राजनीतिक स्थिति अलग होती। जवाब में प्रियंका गांधी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ममता बनर्जी को हमेशा सम्मान और स्नेह दिया था।
इस पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और कांग्रेस ने सीपीएम के साथ गठबंधन कर लिया, जबकि ममता बनर्जी हमेशा उसके विरोध में रहीं। इसी राजनीतिक मतभेद के बाद वर्ष 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया।