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कर्नाटक में कांग्रेस के सामने नई चुनौती, मुस्लिम नेताओं ने कैबिनेट में पांच प्रतिनिधियों की मांग उठाई

कर्नाटक में मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलेमाओं ने कांग्रेस सरकार से पांच मुस्लिम नेताओं को मंत्री बनाने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। राज्य के मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलेमाओं ने सरकार से मंत्रिमंडल में मुस्लिम समुदाय को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करते हुए पांच मुस्लिम नेताओं को कैबिनेट में शामिल करने की अपील की है। उनका कहना है कि कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में मुस्लिम समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए सरकार में भी उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यह मांग हुबली के बेल्लीनगर स्थित हजरत सैयद फतेह शाह वली दरगाह में आयोजित मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं की बैठक में उठाई गई। बैठक के दौरान विशेष प्रार्थना भी की गई और समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा हुई।

बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं बी.जेड. जमीर अहमद खान, एन.ए. हैरिस, तनवीर सैत और सलीम अहमद को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग की गई। नेताओं का तर्क था कि विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर पहले से ही एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए समुदाय के अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्री बनाया जाना चाहिए।

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सभा को संबोधित करते हुए कुछ धर्मगुरुओं ने चेतावनी दी कि यदि पांच मुस्लिम नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया गया तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं। उनका कहना था कि मुस्लिम समुदाय ने हमेशा कांग्रेस का समर्थन किया है और सरकार बनने में उसकी अहम भूमिका रही है।

वक्ताओं ने कहा कि जमीर अहमद खान, एन.ए. हैरिस, तनवीर सैत और सलीम अहमद जैसे नेता पिछले कई दशकों से कांग्रेस के प्रति निष्ठावान रहे हैं और उन्होंने पार्टी तथा समुदाय दोनों के लिए लगातार काम किया है। इसलिए उन्हें सम्मानजनक जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।

बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो पूरे कर्नाटक में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समुदाय अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने से पीछे नहीं हटेगा और इस मुद्दे को भविष्य में भी मजबूती से उठाता रहेगा।

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