कर्नाटक में घर बैठे मिलेंगे जाति और निवास प्रमाण पत्र, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का बड़ा ऐलान
कर्नाटक सरकार ने जाति प्रमाण पत्र की मुफ्त डोरस्टेप सेवा शुरू करने और उप तहसीलदारों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देने की घोषणा की है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को राज्य के नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए जाति प्रमाण पत्र की मुफ्त डोरस्टेप (घर-घर) डिलीवरी और स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा की। सरकार ने इस दिशा में अहम प्रशासनिक बदलाव करते हुए उप तहसीलदारों (डिप्टी तहसीलदार) को स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार भी सौंप दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अब लोगों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि यह सेवा उनके घर तक पहुंचाई जाएगी।
डी.के. शिवकुमार ने बताया कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने की शक्ति उप तहसीलदारों को दिए जाने से आवेदन के निस्तारण में लगने वाला समय कम होगा और लोगों को जल्द प्रमाण पत्र मिल सकेगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।
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मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय विशेष रूप से छात्रों, नौकरी के अभ्यर्थियों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। अक्सर जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने में देरी होने से लोगों को विभिन्न योजनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को अधिक अधिकार मिलने से प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों को यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और लोगों को समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित की जाएं।
कर्नाटक सरकार की यह पहल नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि डिजिटल और स्थानीय प्रशासनिक सुधारों के जरिए सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और जनहितकारी बनाया जा सकता है।
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