कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला: बीडब्ल्यूएसएसबी को निजी जमीन से सीवर लाइन बिछाने की अनुमति, भूमि अधिग्रहण जरूरी नहीं
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीडब्ल्यूएसएसबी को निजी जमीन से सीवर लाइन बिछाने की अनुमति देने वाले कानून को वैध बताया। अदालत ने मुआवजा और कम नुकसान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) अधिनियम, 1964 के उन प्रावधानों को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है, जिनके तहत बोर्ड को निजी सहित किसी भी संपत्ति के ऊपर, नीचे या उसके पार सीवर लाइन बिछाने और उसका रखरखाव करने का अधिकार मिलता है, और इसके लिए भूमि अधिग्रहण अनिवार्य नहीं है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए आवश्यक सीवर व्यवस्था को सुचारू रूप से विकसित किया जा सके, लेकिन इसके साथ ही निजी संपत्ति के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए।
अदालत ने धारा 39 (मुख्य पाइपलाइन बिछाने की शक्ति), धारा 76 (सीवर के ऊपर निर्माण पर प्रतिबंध) और धारा 77 (सीवर उपयोग हेतु संपत्ति के अधिकार) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरा ढांचा एक सीमित वैधानिक अधिकार प्रदान करता है, जिसमें प्रक्रिया और मुआवजे की पर्याप्त सुरक्षा शामिल है।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस कानून का यह अर्थ नहीं है कि भूमि पर “असीमित कब्जा या अधिग्रहण” किया जा सकता है। इसके अनुसार, बीडब्ल्यूएसएसबी को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्य के दौरान कम से कम नुकसान हो और किसी भी प्रकार की क्षति होने पर पूरा मुआवजा दिया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास और निजी संपत्ति के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
यह फैसला बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सीवरेज और जल प्रबंधन प्रणाली के विस्तार की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
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