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कर्नाटक भर्ती घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच पर लगाई रोक

कर्नाटक भर्ती घोटाले के दो मामलों में हाईकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। राज्य सरकार को अधिकारियों पर आपत्तियां और वैकल्पिक नाम देने होंगे।

कर्नाटक में सरकारी भर्ती से जुड़े कथित घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें दो मामलों की नए सिरे से जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिया।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट ने मौजूदा आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में किसी तरह की खामी या प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज किए बिना ही एसआईटी गठित कर दी। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के सामने कहा कि जांच पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है, फिर भी हाईकोर्ट ने अपनी ओर से अधिकारियों का चयन करके एसआईटी बनाने का निर्देश दिया।

21 सितंबर के अपने आदेश में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक कारागार एवं सुधार सेवाओं के डीजीपी आलोक कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इस टीम को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) से जुड़े दो कथित भर्ती मामलों की नए सिरे से जांच करनी थी।

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पहले मामले में 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच होनी थी। दूसरे मामले में निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार की बेटी की राज्य उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में कथित अवैध नियुक्ति का मामला शामिल था।

राज्य सरकार ने यह भी आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट ने सरकार से परामर्श किए बिना एसआईटी के सदस्यों का चयन किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित मामलों की सीआईडी जांच अंतिम चरण में है और जांच एजेंसी के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाए गए हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि जब जांच एजेंसी के खिलाफ दुर्भावना से काम करने का आरोप नहीं है, तब नए सिरे से जांच की आवश्यकता पर भी राज्य ने आपत्ति जताई है। इसके अलावा, सरकार ने एसआईटी में शामिल कुछ अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के संबंधित निर्देशों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से अगली सुनवाई तक एसआईटी सदस्यों को लेकर अपनी आपत्तियां सीलबंद लिफाफे में देने को कहा है। सरकार वैकल्पिक अधिकारियों के नाम भी सुझा सकती है।

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