कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने दिया इस्तीफा, बोले- मनुवादियों ने मुझे बनाया निशाना
कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच इस्तीफा दे दिया। उन्होंने खुद को साजिश के तहत निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।
कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार शाम राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की घोषणा करते समय नागेंद्र भावुक हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ‘मनुवादियों’ ने निशाना बनाया है, क्योंकि वे किसी आदिवासी व्यक्ति को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते।
नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्तीफा देने का फैसला किया है, ताकि विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के कारण उनकी पार्टी को किसी तरह की शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का डर दिखाकर दबाया नहीं जा सकता।
यह विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। भाजपा लगातार निगम में करीब 89 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप लगाती रही है।
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मामला मई 2024 में निगम के लेखा अधिकारी चंद्रशेखरन पी. की आत्महत्या के बाद सामने आया था। उनके पीछे छोड़े गए कथित नोट में धन के अनधिकृत हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। बाद की जांच में निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजे जाने की बात सामने आई।
नागेंद्र ने जून 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल से भी इस्तीफा दिया था। उन पर वाल्मीकि निगम के धन को कथित तौर पर बिना अनुमति स्थानांतरित करने के आरोप लगे थे। जुलाई 2024 में प्रवर्तन निदेशालय ने लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था।
इसके बाद 3 अगस्त 2026 को नागेंद्र को दोबारा कर्नाटक मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन करीब 25 दिन बाद उन्होंने फिर इस्तीफा दे दिया।
नागेंद्र ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए उन्हें डराने या दबाव में लाने की कोशिश सफल नहीं होगी। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।