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कर्नाटक एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग से बीजेपी में हड़कंप, 11 एनडीए विधायक जांच के दायरे में

कर्नाटक एमएलसी चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग से भाजपा और जेडी(एस) में हलचल मच गई है। 11 एनडीए विधायक जांच के घेरे में हैं और भाजपा ने जांच समिति गठित की है।

कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र और अन्य नेताओं को 23 जून को दिल्ली तलब किया है।

हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में सात सीटों के लिए मतदान हुआ था। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को दो सीटें मिलीं। चुनाव परिणामों से यह भी सामने आया कि कांग्रेस को अपेक्षित 140 वोटों के मुकाबले 151 वोट मिले, जिससे भाजपा और जेडी(एस) विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की आशंका मजबूत हुई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने इसे "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि पार्टी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता सी. टी. रवि करेंगे और रिपोर्ट 25 जून तक सौंपे जाने की उम्मीद है।

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रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 11 एनडीए विधायक जांच के दायरे में हैं। इनमें भाजपा के तीन और जेडी(एस) के आठ विधायकों पर कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का आरोप है। इसके अलावा भाजपा के एक विधायक का वोट अमान्य घोषित किया गया।

कांग्रेस के उम्मीदवार थिप्पन्नप्पा कमकनूर, पी. वी. मोहन, बी. के. हरिप्रसाद, शिवन्ना बी. एस. और विनय कार्तिक प्रकाश विजयी रहे। भाजपा के लिंगराज पाटिल और रघु आर. ने भी जीत हासिल की, जबकि जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा नेतृत्व का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी पूरे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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