कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस को फायदा, भाजपा-जेडी(एस) में बढ़ी बेचैनी
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटें जीत लीं। अतिरिक्त 11 वोट मिलने से भाजपा और जेडी(एस) विधायकों की कथित क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है।
कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ी राजनीतिक बढ़त दिलाई है, जबकि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि सबसे अधिक चर्चा विपक्षी दलों के विधायकों द्वारा कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर हो रही है।
कांग्रेस को अपने पांच उम्मीदवारों को जिताने के लिए 140 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता थी, लेकिन मतगणना में पार्टी को कुल 151 प्रथम वरीयता वोट मिले। यानी कांग्रेस को अपेक्षा से 11 वोट अधिक प्राप्त हुए। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि भाजपा और जेडी(एस) के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।
चूंकि मतदान गुप्त मतपत्र के जरिए हुआ था, इसलिए दोनों विपक्षी दलों के लिए यह पता लगाना आसान नहीं होगा कि किस विधायक ने क्रॉस वोटिंग की। भाजपा नेताओं का मानना है कि निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार के अलावा कुछ अन्य विधायकों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया हो सकता है।
और पढ़ें: न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में गोलीबारी से मची अफरा-तफरी, सैकड़ों लोग जान बचाकर भागे; एक गिरफ्तार
वहीं जेडी(एस) के भीतर भी क्रॉस वोटिंग को लेकर मतभेद हैं। कुछ भाजपा नेताओं का दावा है कि कई जेडी(एस) विधायक कांग्रेस के साथ चले गए, जबकि जेडी(एस) नेताओं का कहना है कि उनके उम्मीदवार गोविंद राजू को 14 वोट मिले, जिससे संकेत मिलता है कि केवल कुछ ही विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की होगी।
कांग्रेस के विनय कार्तिक, टिप्पन्नप्पा कामकनूर, बी.एस. शिवन्ना, बी.के. हरिप्रसाद और पी.वी. मोहन विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए हैं। इन जीतों के साथ 75 सदस्यीय परिषद में कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हो गई है, जिससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में आसानी होगी।
यह चुनाव उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी एक अहम राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था, जिसमें पार्टी ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया।