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कश्मीर में प्रवासी पक्षियों की बहार, सरकार के संरक्षण प्रयासों से आर्द्रभूमि और पर्यावरणीय पर्यटन को मजबूती

कश्मीर में प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ी है। सरकारी संरक्षण, वेटलैंड पुनरुद्धार और पर्यावरणीय पर्यटन पहलों से आर्द्रभूमियों की सुरक्षा मजबूत हुई और क्षेत्र की जैव विविधता को नया संबल मिला।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में पर्यावरणीय पर्यटन और प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अपने प्रयास और तेज कर दिए हैं। विशेष रूप से आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव कश्मीर में प्रवासी पक्षियों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आया है।

सरकार द्वारा वेटलैंड्स के पुनरुद्धार, जल प्रबंधन में सुधार, अवैध शिकार पर सख्ती और सतत पर्यटन को प्रोत्साहित करने जैसी पहलों से कश्मीर ने एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों और पक्षी निरीक्षकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। खासकर सर्दियों के महीनों में यह क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में कश्मीर की सर्दियों में एक बार फिर हजारों प्रवासी या “मेहमान” पक्षियों का आगमन देखने को मिला है। होकर्सर, हाइगाम, पंपोर और बांदीपोरा जैसी प्रमुख आर्द्रभूमियों में हर साल नवंबर से साइबेरिया, रूस, चीन, उत्तरी यूरोप और मध्य एशिया से ये पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचते हैं। ये पक्षी लगभग पांच से छह महीने तक घाटी की ठंडी झीलों में प्रवास करते हैं, जिससे झीलों में रंग, जीवन और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।

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हालांकि ये पक्षी प्राकृतिक रूप से जलकुंभी, जड़ी-बूटियों और कीटों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन वेटलैंड प्राधिकरण, विशेष रूप से होकर्सर में, अतिरिक्त अनाज उपलब्ध कराकर इनके लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करता है।

वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों का मौसम आमतौर पर दिसंबर में शुरू होकर लगभग तीन महीने तक चलता है, जिसमें करीब दो लाख पक्षी घाटी में पहुंचते हैं। इस दौरान पर्याप्त जल स्तर बनाए रखना और अवैध शिकार को रोकना प्रमुख चुनौतियां रहती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए विशेष गश्ती दल तैनात किए गए हैं और निरंतर निगरानी की जा रही है।

अक्टूबर से ही कश्मीर की आर्द्रभूमियां पक्षियों की गतिविधियों से जीवंत होने लगती हैं और फरवरी तक इनकी संख्या चरम पर पहुंच जाती है। घाटी के नौ प्रमुख विश्राम स्थलों में होकर्सर सबसे अधिक प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है और उनके लिए अहम शीतकालीन आश्रय स्थल माना जाता है।

स्थानीय निवासी और छात्र मानते हैं कि ये प्राकृतिक दृश्य कश्मीर की उस खूबसूरती को सामने लाते हैं, जिसे अक्सर गुलमर्ग, पहलगाम और डल झील जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों तक सीमित कर दिया जाता है। जागरूकता कार्यक्रम और शैक्षणिक भ्रमण युवाओं को आर्द्रभूमियों के महत्व और क्षेत्र की पारिस्थितिक पहचान से जोड़ रहे हैं।

वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हर फरवरी बड़े स्तर पर पक्षी गणना की जाती है, जिसमें पिछले वर्षों में 70 से 80 लाख पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। प्रशासन ने प्रवासी पक्षियों और उनके आवासों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी और गर्व का विषय बताया है।

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