19वीं सदी की सोच: केरल के मुख्यमंत्री ने ग्रैंड मुफ्ती की महिलाओं को लेकर टिप्पणी खारिज की
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने महिलाओं को घरों तक सीमित रखने संबंधी ग्रैंड मुफ्ती की टिप्पणी खारिज की और कहा कि महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी की हकदार हैं।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के उस बयान को खारिज कर दिया है, जिसमें महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में आने को लेकर आपत्ति जताई गई थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार और पार्टी इस विचार का समर्थन नहीं करती।
सतीशन ने कहा कि महिलाओं को घरों के भीतर दबकर रहने की बात 19वीं सदी की सोच है, जिसे 21वीं सदी में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का रुख प्रगतिशील है और महिलाएं समाज के मुख्यधारा के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएं, यही उनकी सोच है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रैंड मुफ्ती की व्याख्या इस्लाम की गलत व्याख्या है। उन्होंने इस्लामी इतिहास का उल्लेख करते हुए पैगंबर मोहम्मद की पहली पत्नी खदीजा का उदाहरण दिया, जो एक सफल कारोबारी थीं। उन्होंने आयशा की भूमिका और रानी बिलकिस का भी जिक्र किया।
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सतीशन ने खलीफा उमर के शासनकाल से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मेहर कम करने के फैसले पर एक महिला ने आपत्ति जताई थी और खलीफा उमर ने उसकी बात को सही माना था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे पता चलता है कि महिलाओं की सार्वजनिक और महत्वपूर्ण भूमिकाएं इस्लामी इतिहास का हिस्सा रही हैं।
विवाद की शुरुआत कोच्चि में आयोजित हब्बुल रसूल सम्मेलन में कंथापुरम के भाषण के बाद हुई। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में लाने से बड़ा विनाश हो सकता है और कुरान में महिलाओं को घरों तक सीमित रहने की बात कही गई है। उन्होंने महिलाओं की तुलना आभूषण से करते हुए अपनी दलील रखी।
यह विवाद पिछले सप्ताह समस्ता केरल जमीयतुल उलेमा की ओर से जारी एक परिपत्र के बाद और बढ़ा, जिसमें मस्जिदों, मदरसों और स्थानीय समितियों से धार्मिक आयोजनों में कुछ सीमाओं का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था।
इस मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी कांग्रेस और माकपा पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही है।
वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इस विवाद पर कोई स्पष्ट पक्ष लेने से इनकार किया। पार्टी ने कहा कि धार्मिक संगठनों की अपनी राय है और राजनीतिक दल का अपना दृष्टिकोण है।