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सबरीमाला हवाई अड्डे के लिए प्रस्तावित चेरुवल्ली एस्टेट पर केरल सरकार को झटका

पाला सब कोर्ट ने चेरुवल्ली एस्टेट विवाद में केरल सरकार के खिलाफ फैसला देते हुए 2005 की भूमि बिक्री को वैध ठहराया, जिससे सबरीमाला हवाई अड्डा परियोजना पर असर पड़ सकता है।

केरल सरकार को चेरुवल्ली एस्टेट के स्वामित्व को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में बड़ा झटका लगा है। पाला स्थित उप-न्यायालय (सब कोर्ट) ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को इस मामले में केरल सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया। अदालत ने वर्ष 2005 में हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड द्वारा 2,263 एकड़ भूमि की आयाना चैरिटेबल ट्रस्ट को की गई बिक्री को वैध ठहराया है।

यह मामला इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चेरुवल्ली एस्टेट को सबरीमाला इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के प्रस्तावित स्थल के रूप में चिन्हित किया गया था। एरूमेली स्थित यह विशाल भूमि लंबे समय से राज्य सरकार और निजी पक्षों के बीच विवाद का विषय बनी हुई थी। राज्य सरकार का दावा था कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है और इसके स्वामित्व पर सरकार का अधिकार बनता है।

हालांकि, पाला सब कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड द्वारा आयाना चैरिटेबल ट्रस्ट को की गई बिक्री प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई। अदालत ने यह भी माना कि बिक्री के समय लागू सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया था, इसलिए इस सौदे को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।

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इस फैसले के बाद केरल सरकार के लिए सबरीमाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना को आगे बढ़ाने में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यह हवाई अड्डा सबरीमाला आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित किया गया था और इसे राज्य के बुनियादी ढांचे की एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा था।

सरकार की ओर से इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। वहीं, आयाना चैरिटेबल ट्रस्ट ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। इस निर्णय का असर न केवल हवाई अड्डा परियोजना पर पड़ेगा, बल्कि राज्य में भूमि स्वामित्व से जुड़े अन्य मामलों के लिए भी एक अहम मिसाल बन सकता है।

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