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सबरीमाला मंदिर पर केरल सरकार का यू-टर्न: 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन

केरल की LDF सरकार ने सबरीमाला मंदिर में 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया। सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर परंपराओं को बनाए रखने की बात कहेगी।

केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपना रुख बदल दिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट को बताएगी कि 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक प्रतिबंध को बनाए रखा जाना चाहिए।

सरकार का यह कदम 2018 में लिए गए उस रुख से अलग है, जब एलडीएफ सरकार ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था। अब सरकार ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें सदियों पुरानी परंपराओं को बनाए रखने की बात कही गई है।

सरकार 14 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेगी। अदालत ने इस मामले में सात संवैधानिक और कानूनी सवालों पर सरकार से जवाब मांगा है। इस बीच 7 अप्रैल से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ के सामने इस मामले की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है।

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इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता कुम्मनम राजशेखरन ने कहा कि सरकार का यह यू-टर्न आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर पहले हुए आंदोलनों में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं।

वहीं सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि पार्टी ने अपना मूल रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित जवाब देने का फैसला किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी केरल विधानसभा चुनाव से पहले यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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