केरल में लिप कट के इलाज के बाद 18 महीने के बच्चे की मौत, परिजनों ने लगाया मेडिकल लापरवाही का आरोप
केरल के कन्नूर में होंठ की चोट के इलाज के दौरान एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद 18 महीने के बच्चे की मौत हो गई। परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाया, जांच शुरू हुई।
केरल के कन्नूर जिले में 18 महीने के एक बच्चे की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है। बच्चे की मौत कथित तौर पर होंठ की मामूली चोट के इलाज के दौरान एनेस्थीसिया दिए जाने के कुछ दिनों बाद हुई। परिजनों ने डॉक्टरों पर चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और राज्य सरकार ने भी जांच के आदेश दिए हैं।
मृतक बच्चे की पहचान देवांश शौर्य के रूप में हुई है। वह सूरज और विजिशा का इकलौता बेटा था। परिजनों के अनुसार, बच्चा खेलते समय गिर गया था, जिससे उसके होंठ और ठुड्डी पर चोट लग गई थी। इसके बाद उसे पय्यान्नूर नगरपालिका क्षेत्र स्थित बेबी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिवार का आरोप है कि चोट पर टांके लगाने से पहले डॉक्टरों ने बच्चे को एनेस्थीसिया दिया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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बच्चे के माता-पिता ने अस्पताल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पय्यान्नूर पुलिस थाने में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. अंजलि पोडुवल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 के तहत दर्ज किया है, जो किसी व्यक्ति की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्य से संबंधित है।
बच्चे का पोस्टमार्टम कन्नूर सरकारी मेडिकल कॉलेज में कराया गया है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि जिला चिकित्सा अधिकारी (डीएमओ) को घटना की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और यदि कोई गलती सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने दावा किया कि एनेस्थीसिया देने के तुरंत बाद बच्चे को अचानक हृदयाघात हुआ था और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।
इस घटना के विरोध में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल तक विरोध मार्च भी निकाला और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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