शुद्धिकरण विवाद पर नेताओं की चुप्पी से आहत खड़गे, सीडब्ल्यूसी बैठक में जताई नाराजगी
मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कांग्रेस नेताओं की चुप्पी से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नेताओं को खुलकर उनका समर्थन करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर पार्टी नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी और निराशा जताई। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने बैठक में कहा कि इस मामले में पार्टी के नेताओं को खुलकर उनका समर्थन करना चाहिए था, लेकिन कई नेताओं ने ऐसा नहीं किया।
खड़गे जिस विवाद का जिक्र कर रहे थे, वह उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम से जुड़ा है। यह कार्यक्रम 8 अगस्त को रामलीला मैदान में खड़गे की सार्वजनिक सभा के बाद आयोजित किया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। हालांकि, बीजेपी ने इस घटना से खुद को अलग कर लिया है।
खड़गे ने सोमवार को गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर किसी नेता के हल्द्वानी में लाखों लोगों के सामने भाषण देने के दो दिन बाद किसी इमारत में शुद्धिकरण किया जाता है, तो यह किस तरह की धार्मिक सोच है। उन्होंने बीजेपी से सवाल किया था कि क्या धर्म और धार्मिक गुरु इस तरह की गतिविधियों की शिक्षा देते हैं।
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संसद में भी उठा मामला
खड़गे ने 13 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि हल्द्वानी में उनका कार्यक्रम राजनीतिक नहीं था और उन्होंने वहां केवल जनता से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने भी घटना से दूरी बनाई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा था कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की पूरी जांच कराने की बात कही, लेकिन खड़गे द्वारा बीजेपी पर सीधे आरोप लगाए जाने को स्वीकार नहीं किया।
इस बीच, खड़गे को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने घटना को बेहद निंदनीय और चिंताजनक बताते हुए पुलिस कार्रवाई की मांग की थी।
सीडब्ल्यूसी बैठक में खड़गे की नाराजगी से साफ है कि यह विवाद अब कांग्रेस के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है।