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टीएमसी विद्रोह पर कीर्ति आज़ाद और निशिकांत दुबे में तीखी बहस, ऑपरेशन लोटस को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

टीएमसी विद्रोह को लेकर कीर्ति आज़ाद और निशिकांत दुबे में तीखी बहस हुई। ‘ऑपरेशन लोटस’ के आरोप-प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रहे कथित विद्रोह को लेकर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे के बीच तीखी शब्दों की जंग छिड़ गई है। मामला तब और बढ़ गया जब कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में “ऑपरेशन लोटस” चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीएमसी को तोड़ना है।

कीर्ति आज़ाद ने दावा किया कि यह “ऑपरेशन लोटस” असफल हो गया है, हालांकि उन्हें भाजपा के कई नेताओं की ओर से पार्टी छोड़ने के लिए फोन आ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका सुरक्षा बल और हाउस गार्ड हटाकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। आज़ाद ने कहा कि वह इस तरह की रणनीति के आगे नहीं झुकेंगे।

इस पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि कीर्ति आज़ाद अपने आवास के अंदर और बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वे दोनों करीब 10 वर्षों तक भाजपा में सांसद रहे हैं और आज़ाद के पिता उनके लिए अभिभावक जैसे थे। दुबे ने यह भी कहा कि झारखंड के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में आज़ाद के क्षेत्र से उन्हें भारी समर्थन मिलता रहा है।

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कीर्ति आज़ाद ने दुबे के जवाब पर कहा कि यह कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और वे केवल “ऑपरेशन लोटस” को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे संसद में निशिकांत दुबे से मुलाकात करेंगे और किसी भी व्यक्तिगत टकराव से बचना चाहिए।

उधर, टीएमसी में आंतरिक संकट गहराता दिख रहा है, जहां 28 में से 19 लोकसभा सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपा है। यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद और तेज हो गया है।

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