कानूनी और सुरक्षा चिंताओं के चलते लद्दाख के उपराज्यपाल ने संरक्षित क्षेत्रों की रिपोर्ट खारिज की
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कानूनी और सुरक्षा चिंताओं के कारण तीन संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं संबंधी रिपोर्ट खारिज की। स्थानीय दावों के निपटारे का निर्देश दिया।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तीन प्रस्तावित संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं से संबंधित एक रिपोर्ट को कानूनी प्रक्रिया, जमीनी मानचित्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते खारिज कर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय समुदायों के अधिकारों और दावों का निपटारा दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है।
इन तीन क्षेत्रों में हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, हाई एल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट (चांगथांग) वन्यजीव अभयारण्य और काराकोरम (नुब्रा-श्योक) वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड (एसबीडब्ल्यूएल) की बैठक में संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं को अंतिम रूप देने और अधिकारों के निर्धारण से संबंधित उप-समिति की रिपोर्ट पर विचार किया गया। इस दौरान रिपोर्ट में कई विसंगतियां सामने आईं। बोर्ड ने संबंधित उपायुक्तों और बंदोबस्त अधिकारियों को सार्वजनिक सुनवाई दोबारा शुरू करने और दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
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कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं
उपराज्यपाल कार्यालय के अनुसार, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत प्रस्तावित संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और समुदायों के अधिकारों के निर्धारण की अनिवार्य प्रक्रिया उप-समिति ने पूरी नहीं की थी। सक्सेना ने कहा कि सीमाओं का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के बजाय एक ‘टेबल-टॉप एक्सरसाइज’ के जरिए किया गया।
प्रशासन के मुताबिक, यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी और प्रभावित समुदायों के लिए असमान स्थिति पैदा कर सकती थी। इससे भविष्य में कानूनी चुनौतियां भी खड़ी हो सकती थीं।
बोर्ड ने यह भी पाया कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से 1987 में जारी प्रारंभिक अधिसूचना में संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं का जमीनी स्तर पर सही मानचित्रण नहीं किया गया था।
स्थानीय लोगों से दावे पेश करने की अपील
स्थानीय समुदायों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से बस्तियां और मानव आबादी मौजूद हैं। उनका आग्रह है कि ऐसी बस्तियों को संरक्षित क्षेत्र की सीमा से बाहर रखा जाए। प्रशासन ने लोगों से अपने दावे, जमीन के दस्तावेज और पारंपरिक अधिकारों से जुड़े प्रमाण पेश करने को कहा है। चरागाह भूमि से जुड़े दावों को भी इसमें शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा भी अहम मुद्दा
सीमा निर्धारण का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। बोर्ड ने कहा कि रिपोर्ट में शामिल कई क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित हैं। रक्षा संबंधी अनिवार्य पहलुओं को रिपोर्ट में पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया।
सक्सेना ने यह भी कहा कि संरक्षित क्षेत्रों की सीमाएं तय करते समय सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्रों में दर्शाई गई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को आधार नहीं बनाया गया। बोर्ड ने इसे आवश्यक बताया।
इसके अलावा, बैठक में 23 परियोजनाओं को मंजूरी देकर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को भेजा गया। इनमें रणनीतिक सीमा क्षेत्रों में बिजली पारेषण, रक्षा और अन्य आवश्यक परियोजनाएं शामिल हैं।
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