2017 लातूर जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव: भाजपा को मिला था स्पष्ट बहुमत
2017 लातूर जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। दोनों स्तरों पर जीत से जिले की ग्रामीण राजनीति में पार्टी का मजबूत वर्चस्व स्थापित हुआ।
फरवरी 2017 में हुए लातूर जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनावों ने जिले की ग्रामीण राजनीति की दिशा तय कर दी थी। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दोनों स्तरों पर स्पष्ट बहुमत मिला, जिससे जिले की स्थानीय शासन व्यवस्था में पार्टी का मजबूत दबदबा स्थापित हुआ। महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में उस समय राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे थे और लातूर जैसे जिलों के स्थानीय निकाय चुनावों को व्यापक राजनीतिक संकेतक के रूप में देखा जा रहा था।
लातूर में लंबे समय से भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच बहुकोणीय मुकाबला होता रहा है। लेकिन 2017 के चुनाव परिणाम पहले की तुलना में अधिक निर्णायक साबित हुए।
जिला परिषद के कुल 58 सीटों में से भाजपा ने 36 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा आराम से पार कर लिया और परिषद पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। कांग्रेस 15 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि एनसीपी को 5 सीटें मिलीं। शिवसेना को 1 सीट मिली और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
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इसी के साथ पंचायत समिति चुनाव भी हुए, जिनमें जिले के विभिन्न ब्लॉकों की 116 सीटों पर मतदान हुआ। यहां भी भाजपा ने बढ़त बनाए रखते हुए 72 सीटें जीत लीं। कांग्रेस को 31 सीटें मिलीं और एनसीपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की। शिवसेना को 3 सीटें मिलीं, जबकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने 1-1 सीट जीती।
वोट प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को लगभग 44.11% वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 29.25% और एनसीपी को 10.75% वोट प्राप्त हुए। शिवसेना को 7.43% और मनसे को करीब 0.57% वोट मिले। बाकी वोट निर्दलीयों और छोटे दलों में बंटे।
इन परिणामों ने लातूर की ग्रामीण राजनीति में भाजपा की मजबूत पकड़ को दर्शाया और यह सवाल भी उठाया कि भविष्य में क्या यह दबदबा कायम रहेगा या मुकाबला और कड़ा होगा।
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