विशाखापत्तनम में डेटा सेंटर परियोजनाओं का वाम दलों ने किया विरोध, जमीन अधिग्रहण पर उठाए सवाल
विशाखापत्तनम में वाम दलों ने आवासीय क्षेत्रों में प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं को वापस लेने की मांग की। उन्होंने पर्यावरण, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी दावों पर सवाल उठाए।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में वाम दलों ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं का विरोध करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की है। वाम नेताओं का आरोप है कि आवासीय क्षेत्रों में स्थापित किए जाने वाले ये प्रोजेक्ट आम लोगों के स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
गुरुवार (23 जुलाई 2026) को विशाखापत्तनम स्थित सीपीआई(एम) जिला कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद पांच वाम दलों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने सरकार की डेटा सेंटर योजनाओं पर सवाल उठाए और कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया।
सीपीआई(एम) विशाखापत्तनम जिला सचिव एम. जग्गू नायडू, सीपीआई जिला सचिव एस.के. रहीमान, एसयूसीआई(सी) जिला सचिव के. गोविंदराजुलु, एमसीपीआई नेता जी.आर.एम. रेड्डी और सीपीआई(एमएल) प्रजा पोरु जिला सचिव के. देवसहायम मौजूद थे।
वाम दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि तारलुवाडा और मुदासरलोवा जलाशय के आसपास के क्षेत्रों में जमीन का अधिग्रहण स्थानीय जनता की सहमति के बिना किया गया। उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि डेटा सेंटर परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगी।
नेताओं का कहना है कि केवल रोजगार का दावा करके ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इनका प्रभाव स्थानीय निवासियों के जीवन और पर्यावरण पर भी पड़ेगा। उन्होंने सरकार से परियोजनाओं की समीक्षा करने और जनता की चिंताओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
वाम दलों ने घोषणा की कि वे 27 जुलाई को तारलुवाडा क्षेत्र का संयुक्त दौरा करेंगे। इस दौरान वे स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और परियोजना से जुड़ी वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाएंगे।
वाम नेताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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