हमारी साझा संस्कृति की रक्षा की लड़ाई है यह चुनाव: उपराष्ट्रपति चुनाव पर वामपंथी दल
वामपंथी दलों ने उपराष्ट्रपति चुनाव को साझा संस्कृति की रक्षा की लड़ाई बताया। पाँच दलों ने विपक्षी उम्मीदवार न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करते हुए इसे भारत के दो विज़नों के बीच मुकाबला कहा।
उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर वामपंथी दलों ने इसे भारत की साझा और बहुलतावादी संस्कृति की रक्षा की लड़ाई बताया है। पाँच वामपंथी दलों ने विपक्ष के उम्मीदवार न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुकाबला भारत के दो अलग-अलग विज़नों के बीच है।
वाम दलों ने कहा कि यह चुनाव केवल एक संवैधानिक पद भरने का मामला नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा। उनका कहना है कि एक ओर ऐसा भारत है जो विविधता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करता है, जबकि दूसरी ओर ऐसा दृष्टिकोण है जो इन मूल्यों को कमजोर करता है।
सुदर्शन रेड्डी को समर्थन देने वाले दलों का मानना है कि वे न्यायपालिका में अपने लंबे अनुभव और निष्पक्ष छवि के कारण उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं। वाम दलों ने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल देश में वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ाने और संस्थाओं को कमजोर करने का काम कर रहा है।
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वामपंथी नेताओं ने जनता और सांसदों से अपील की कि वे ऐसे उम्मीदवार को चुनें जो संविधान की रक्षा करने के साथ-साथ भारत की साझा संस्कृति और लोकतांत्रिक ढांचे को भी सुरक्षित रखे। उनका कहना है कि यह चुनाव भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला है और इसे केवल सत्ता संघर्ष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
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