×
 

CJI सूर्यकांत ने कहा- पिछले दशक में विधायी सुधार और न्यायिक अनुशासन एकसाथ काम किए

CJI सूर्यकांत ने कहा कि पिछले दशक में विधायी सुधार और न्यायिक अनुशासन ने मिलकर काम किया, जिससे न्यायिक निगरानी और न्यूनतम हस्तक्षेप की भावना मजबूत हुई।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि पिछले दशक में विधायी सुधार और न्यायिक अनुशासन ने एक साथ मिलकर कार्य किया है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 'मध्यस्थता और सुलह अधिनियम' (Arbitration and Conciliation Act) में किए गए संशोधनों ने समय-सीमा को कड़ा किया है, तटस्थता मानकों को मजबूत किया है और न्यायिक निगरानी की सीमाओं को स्पष्ट किया है।

प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालतों ने बार-बार न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांत की पुष्टि की है, जबकि जहां प्राकृतिक न्याय की आवश्यकता हो, वहां वे सतर्क भी रहती हैं।

और पढ़ें: सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब में सत्ता में आने पर बठिंडा को औद्योगिक हब बनाने का वादा किया

CJI ने विधायी और न्यायिक दोनों क्षेत्रों में सुधारों के बीच सामंजस्य की सराहना की और इसे न्यायपालिका के कामकाज में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के रूप में देखा। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका ने हर स्थिति में न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप को कम रखने का प्रयास किया है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि अगर किसी मामले में प्राकृतिक न्याय की आवश्यकता हो, तो उस पर उचित ध्यान दिया जाए।

इस मौके पर सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी जिम्मेदारियों को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि न्यायपालिका के सुधार से देश में न्याय के प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।

और पढ़ें: केरल चुनाव के लिए राहुल गांधी ने की 5 गारंटियों की घोषणा, पीएम मोदी और सीएम विजयन पर कसा तंज

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share