लखनऊ अग्निकांड पर बड़ा एक्शन, 4 अधिकारी निलंबित, 4 गिरफ्तार; 2016 का ध्वस्तीकरण आदेश भी जांच के घेरे में
लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों के बाद सरकार ने एसआईटी गठित की है। चार आरोपी गिरफ्तार और चार अधिकारी निलंबित हुए हैं। 2016 का ध्वस्तीकरण आदेश भी जांच के घेरे में है।
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री आवास पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए।
सरकार ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति) अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार कर रहे हैं। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में भवन मालिक राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषक कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
और पढ़ें: बिहार के वैभव सूर्यवंशी को मिली टीम इंडिया की जर्सी, डेब्यू से पहले भावुक हुआ युवा सितारा
हादसे के बाद सरकार ने विभिन्न विभागों के चार अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया है। इनमें विद्युत विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारी शामिल हैं। इन पर लापरवाही और नियमों के पालन में चूक के आरोप हैं।
मंगलवार सुबह फॉरेंसिक विशेषज्ञों की छह सदस्यीय टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। वहीं, राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
इस बीच, भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोपों के चलते एलडीए ने भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया था। हालांकि, 10 मई 2016 को जारी यह आदेश 5 जुलाई 2016 को वापस ले लिया गया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आदेश क्यों वापस लिया गया और क्या इसी लापरवाही ने इस भीषण हादसे की जमीन तैयार की।
और पढ़ें: भारत-मंगोलिया संबंधों को नई मजबूती देने पहुंचे एस. जयशंकर, रणनीतिक साझेदारी पर जोर