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मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना का बढ़ता बोझ, राज्य का कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर

लाड़ली बहना योजना की बढ़ती लागत ने मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ाया है। सहायता राशि बढ़ने के साथ राज्य का कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना राज्य के लिए एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी बनती जा रही है, ऐसे समय में जब प्रदेश का कर्ज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। इस योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि को नवंबर 2025 में 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया था, साथ ही भविष्य में इसे 3,000 रुपये तक पहुंचाने का राजनीतिक वादा भी किया गया है।

जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की शुरुआत करते हुए लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की थी। ढाई साल बाद, वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नर्मदापुरम में आयोजित राज्य स्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में 1.2531 करोड़ पात्र महिलाओं के खातों में 1,836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर करेंगे।

हालांकि योजना जारी है, लेकिन इसका वित्तीय बोझ काफी बढ़ चुका है। जो योजना शुरुआत में एक लक्षित कल्याणकारी पहल थी, वह अब राज्य के बजट की सबसे महंगी नियमित योजनाओं में शामिल हो गई है। इसके बावजूद लाभार्थियों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। योजना शुरू होने पर करीब 1.29 करोड़ महिलाएं इससे जुड़ी थीं, जो अक्टूबर 2023 में बढ़कर 1.31 करोड़ तक पहुंच गईं। अब यह संख्या घटकर लगभग 1.25 करोड़ रह गई है।

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पिछले 30 महीनों में 5.7 लाख से अधिक महिलाओं को योजना से बाहर किया गया है और नए पंजीकरण पर रोक लगी हुई है। इनमें से करीब 1.5 लाख महिलाएं 60 वर्ष की आयु पार करने के कारण अपात्र हुईं। सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि उम्र और पात्रता के आधार पर नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन नए नाम नहीं जोड़े जा रहे।

शिवराज सिंह चौहान ने पहले इस योजना की अवधारणा बताते हुए कहा था कि मासिक सहायता महिलाओं को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगी। लेकिन आज यह “आंदोलन” राज्य के लिए भारी कीमत लेकर आया है।

पिछले 30 महीनों में मध्य प्रदेश ने महिलाओं को कुल 48,632.70 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। अकेले 2026-27 वित्तीय वर्ष में इस योजना पर करीब 22,680 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसी दौरान राज्य हर दिन औसतन 125 करोड़ रुपये उधार ले रहा है और कुल कर्ज बढ़कर 4,64,340 करोड़ रुपये हो गया है।

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