मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव, नए वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्य शामिल
मध्यप्रदेश में नए वक्फ कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है, जिसमें पहली बार दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति हुई है। यह ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नए वक्फ कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है। यह देश में पहली बार हुआ है जब किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम यानी हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने कुल 10 सदस्यीय नए वक्फ बोर्ड का गठन किया है, जिसमें दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति की गई है।
इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को वक्फ बोर्ड का सदस्य बनाया गया है। राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसके अनुसार सनवर पटेल को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले भी बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं।
नए वक्फ बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें विधायक आतिफ अकील (भोपाल उत्तर), फैजान खान (उज्जैन), नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली), शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया), बहन फातेमा चौधरी (इंदौर), शबाना खान (पार्षद, रतलाम), मनोज मालपानी (इंदौर), अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना) और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त शामिल हैं।
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सरकारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल 18 अप्रैल 2028 तक जारी रहेगा, क्योंकि उनका चयन पहले 2023 में वक्फ अधिनियम के तहत किया गया था। इसलिए उन्हें नए बोर्ड में भी शामिल रखा गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मध्यप्रदेश संशोधित वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधित 2025) की धारा 13 और 14 के प्रावधानों के तहत नया वक्फ बोर्ड गठित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
इस फैसले को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और विविधता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।