विशेषज्ञ गवाह के रूप में पेश होने वाले डॉक्टरों के लिए दिशा-निर्देश जारी करे तमिलनाडु सरकार: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार को विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत में पेश होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की जिम्मेदारियों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा।
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत उन चिकित्सा पेशेवरों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया, जिन्हें अदालतों में विशेषज्ञ गवाह के रूप में पेश होना पड़ता है।
अदालत ने तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा निदेशक को सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक व्यापक परिपत्र या दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है। इसमें विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत के सामने उपस्थित होने वाले डॉक्टरों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना है।
अदालत का यह निर्देश न्यायिक मामलों में चिकित्सकीय विशेषज्ञों की भूमिका को अधिक व्यवस्थित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपराधिक और अन्य न्यायिक मामलों में डॉक्टरों की विशेषज्ञ राय कई बार अहम साक्ष्य के तौर पर सामने आती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चोटों की प्रकृति, मेडिकल जांच और उपचार से संबंधित जानकारी को अदालत के सामने रखने में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
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हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में चिकित्सा पेशेवरों की जिम्मेदारियों और अदालत में विशेषज्ञ गवाह के रूप में पेश होने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से बताया जाए। इससे डॉक्टरों को अपनी भूमिका समझने में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में चिकित्सकीय साक्ष्य को अधिक प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
राज्य सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले परिपत्र को सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा। इससे विभिन्न संस्थानों में विशेषज्ञ गवाहों से संबंधित प्रक्रिया में एकरूपता आने की उम्मीद है।
अदालत के इस कदम का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र और न्यायिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों को अदालत में अपनी पेशेवर राय प्रस्तुत करते समय किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना है, इसे स्पष्ट करने से मामलों की सुनवाई में भी सुविधा हो सकती है।
अब स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।