कथित विधायक रिश्वत मामले में डीएमके नेता वी. सेंथिल बालाजी को राहत, मद्रास हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
मद्रास हाईकोर्ट ने कथित 35 करोड़ रुपये के विधायक रिश्वत मामले में डीएमके नेता वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है।
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को डीएमके विधायक और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को कथित विधायक रिश्वत मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर. वी. अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
यह मामला कथित तौर पर 35 करोड़ रुपये की रिश्वत से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि एक तमिलगा विधायक को अपने पक्ष में करने और राजनीतिक दल बदलने के प्रयास से संबंधित मामले में अवैध लेनदेन किया गया। इस मामले में पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपों की जांच कर रही हैं।
सेंथिल बालाजी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी जाए ताकि वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।
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मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत देने का फैसला किया। अदालत ने जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने जैसी शर्तें लगाई हैं।
वी. सेंथिल बालाजी डीएमके के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और वह तमिलनाडु सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इससे पहले भी वह कई कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
कथित रिश्वत मामले को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में काफी विवाद हुआ था। विपक्षी दलों ने सरकार और डीएमके नेताओं पर सवाल उठाए थे, जबकि डीएमके ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सेंथिल बालाजी और उनके समर्थकों को राहत मिली है। हालांकि, मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
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