एक वोट से जीत का मामला: मद्रास हाई कोर्ट ने टीवीके विधायक की जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन की चुनाव याचिका खारिज कर दी, जिसमें टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति की एक वोट से जीत को चुनौती दी गई थी।
मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन की चुनाव याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। सेतुपति ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से महज एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी।
डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन ने अदालत में याचिका दायर कर टीवीके विधायक के निर्वाचन को चुनौती दी थी। चुनाव परिणाम में आर. श्रीनिवास सेतुपति की जीत का अंतर केवल एक वोट रहा था, जिसके कारण यह मुकाबला बेहद करीबी चुनावी परिणाम के तौर पर सामने आया।
याचिका में चुनाव परिणाम को चुनौती दी गई थी और अदालत से संबंधित चुनाव को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही सेतुपति के निर्वाचन को चुनौती देने वाली पेरियाकरुप्पन की याचिका पर न्यायालय की ओर से फैसला सामने आया।
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2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र का परिणाम विशेष रूप से चर्चा में रहा, क्योंकि विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच सिर्फ एक वोट का अंतर था। इतने कम अंतर से परिणाम आने के कारण चुनावी प्रक्रिया और परिणाम को लेकर कानूनी चुनौती भी सामने आई।
आर. श्रीनिवास सेतुपति तमिलगा वेट्री कज़गम से विधायक चुने गए हैं। वहीं, केआर पेरियाकरुप्पन ने डीएमके उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। चुनाव परिणाम के बाद पेरियाकरुप्पन ने सेतुपति के निर्वाचन को अदालत में चुनौती दी।
मद्रास हाई कोर्ट के सोमवार के फैसले के बाद तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से सेतुपति की जीत को चुनौती देने वाली यह चुनाव याचिका समाप्त हो गई है। अदालत के फैसले से संबंधित पक्षों की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
यह मामला तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बेहद कम अंतर से हुए चुनावी मुकाबले और उसके बाद सामने आई कानूनी चुनौती के कारण महत्वपूर्ण रहा।
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