मृत व्यक्तियों के नाम आए डाक पार्सल की डिलीवरी पर भ्रम दूर करें: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने मृत व्यक्तियों के नाम आए डाक सामान की डिलीवरी पर जारी भ्रम दूर करने का निर्देश दिया। कानूनी उत्तराधिकारियों को पार्सल सौंपने को कहा गया।
मद्रास हाईकोर्ट ने मृत व्यक्तियों के नाम संबोधित डाक वस्तुओं की डिलीवरी को लेकर जारी भ्रम को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय और डाक सेवाओं के महानिदेशक (डीजीपीएस) को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि पोस्ट ऑफिस विनियम, 2024 की दो धाराओं के बीच व्याख्यात्मक टकराव के कारण यह भ्रम पैदा हुआ है कि मृत व्यक्ति के नाम आए डाक पार्सल या पत्र किसे सौंपे जाएं।
खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरासन से कहा कि वे इस आदेश की प्रति डाक सेवाओं के महानिदेशक को भेजें ताकि आवश्यक अनुपालन और आगे की कार्रवाई की जा सके।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक डीजीपीएस इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेते, तब तक मृतक के निवास स्थान पर उपस्थित उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को ही संबंधित डाक सामग्री सौंपी जानी चाहिए। अदालत का मानना है कि इससे अनावश्यक कानूनी विवाद और प्रशासनिक कठिनाइयों से बचा जा सकेगा।
याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि कई मामलों में डाक विभाग मृत व्यक्ति के नाम आए पार्सल को लौटाने या रोकने की प्रक्रिया अपनाता है, जिससे परिवार के सदस्यों को परेशानी होती है। अदालत ने कहा कि इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक हैं ताकि डाक वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनी रहे।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि नियमों में यदि किसी प्रकार का अस्पष्टता है तो उसे शीघ्र दूर किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को असुविधा न हो।
इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि डाक विभाग जल्द ही स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करेगा, जिससे भविष्य में इस प्रकार की स्थितियों में भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
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