पूर्व डीएमके विधायक एल. इदयवर्मन को मद्रास हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर रद्द करने से इनकार
मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व डीएमके विधायक एल. इदयवर्मन की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और पुलिस को चार सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
मद्रास हाईकोर्ट ने द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के पूर्व विधायक और वर्तमान तिरुपोरूर पंचायत संघ के अध्यक्ष एल. इदयवर्मन को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामल्लापुरम पुलिस को मामले की जांच चार सप्ताह के भीतर पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला नेम्मेली समुद्री जल अलवणीकरण संयंत्र में सार्वजनिक संपत्ति को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है। आरोप है कि 6 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले एल. इदयवर्मन ने संयंत्र परिसर में लगाए गए सुरक्षा इंतजामों को नुकसान पहुंचाया था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जी. के. इलंथिरैयन की एकल पीठ ने की। अदालत ने एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामले की जांच जारी रखने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश लोक अभियोजक आर. जॉन सत्यन ने अदालत के समक्ष एक वीडियो क्लिप प्रस्तुत की। इस वीडियो में कथित तौर पर एल. इदयवर्मन चेन्नई महानगर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (सीएमडब्ल्यूएसएसबी) द्वारा लगाए गए हरे रंग के सुरक्षा जाल (ग्रीन सेफ्टी नेट) को नुकसान पहुंचाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो देखने के बाद अदालत ने माना कि मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसलिए एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मामल्लापुरम पुलिस चार सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर आरोपपत्र अथवा अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे।
यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला एक पूर्व विधायक और वर्तमान स्थानीय निकाय अध्यक्ष से जुड़ा है। अब पुलिस को अदालत के निर्देशानुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।