महाराष्ट्र में नीट प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, सरकार ने मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया मंजूर की
महाराष्ट्र सरकार ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया मंजूर की। समयसीमा बढ़ाकर मार्च 2027 की गई।
महाराष्ट्र में नीट पेपर लीक के कथित मामले के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। सरकार ने बुधवार को इस संबंध में शासनादेश (जीआर) भी जारी किया।
शासनादेश के मुताबिक, ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए पहले निर्धारित 31 जुलाई 2026 की समयसीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। इस फैसले के दायरे में राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े वे मामले भी शामिल हैं, जिनमें निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया जाना जरूरी है।
हजारों छात्रों ने किया था प्रदर्शन
नीट पेपर लीक के कथित मामले को लेकर महाराष्ट्र के कई हिस्सों, खासकर मुंबई में हजारों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की थी।
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18 जुलाई से लगातार सात दिनों तक चले आंदोलन के दौरान मुंबई पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इन पर कथित रूप से गैरकानूनी जमावड़े और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(2) तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे।
क्यों बढ़ाई गई समयसीमा?
मामले वापस लेने से पहले पुलिस को जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल करना होगा। यदि आरोपपत्र दाखिल नहीं होता है, तो पुलिस अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। समयसीमा बढ़ने से अधिकारियों को इन कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। गृह विभाग ने विशेष रूप से मुंबई में दर्ज मामलों का विवरण जुटाना शुरू कर दिया है।
हालांकि, प्रत्येक मामले की वापसी निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। छात्रों के लिए यह फैसला आंदोलन से जुड़े आपराधिक मामलों से राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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