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LPG की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार सतर्क, कंट्रोल रूम और जिला समितियां गठित

पश्चिम एशिया संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने LPG आपूर्ति की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम और जिला समितियां बनाई हैं। सरकार ने कहा कि राज्य में गैस की कोई कमी नहीं है।

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

सरकारी बयान के अनुसार, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल दिग्गीकर ने सभी जिलों के अधिकारियों को एलपीजी वितरण व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, ताकि आपूर्ति की स्थिति पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके।

सरकार ने बताया कि प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सरकारी तेल कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनका मुख्य काम एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करना, कानून व्यवस्था बनाए रखना और रोजाना स्थिति की रिपोर्ट तैयार करना होगा।

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मुंबई-ठाणे राशनिंग क्षेत्र के लिए भी अलग समिति बनाई जाएगी, जो राशनिंग नियंत्रक के नेतृत्व में काम करेगी। इस समिति में पुलिस के उप आयुक्त और उप राशनिंग नियंत्रक जैसे अधिकारी शामिल होंगे।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, स्कूल-कॉलेज के मेस, मध्याह्न भोजन रसोई और आश्रम स्कूलों को एलपीजी की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर केरोसिन या कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग पर भी विचार किया जा सकता है, बशर्ते महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन किया जाए।

सरकार ने अफवाहों पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों को रेडियो, एफएम चैनल, टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रतिदिन सही जानकारी प्रसारित करने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र में रोजाना करीब 9,000 मीट्रिक टन एलपीजी की मांग होती है, जबकि रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार ने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल का भंडार भी पर्याप्त है।

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