महाराष्ट्र में बारिश की कमी जारी, मौसम विभाग ने एल नीनो प्रभाव को बताया कारण
महाराष्ट्र के अधिकांश जिलों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम विभाग ने एल नीनो प्रभाव को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया। आने वाले दिनों में हल्की बारिश की संभावना है।
महाराष्ट्र में इस मानसून सीजन में बारिश की कमी लगातार बनी हुई है। राज्य के अधिकांश जिलों में 1 जून से अब तक हुई वर्षा मौसमी औसत से कम दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों ने इस स्थिति के पीछे एल नीनो प्रभाव को एक प्रमुख कारण बताया है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के कई जिलों में इस अवधि के लिए अपेक्षित बारिश की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। वहीं कुछ क्षेत्रों में यह कमी 50 से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे किसानों और कृषि गतिविधियों पर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, पिछले सप्ताह कोंकण और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। इन क्षेत्रों में जुलाई महीने के औसत से ज्यादा वर्षा हुई, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में बारिश की कमी पूरी नहीं हो सकी।
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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले सप्ताह में राज्य के कुछ अलग-अलग इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, 13 और 14 जुलाई के लिए किसी भी तरह की बड़ी मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की शुरुआत के बाद बारिश का असमान वितरण महाराष्ट्र में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो रही है, जबकि कई जिलों में अब भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार है।
बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। राज्य के कई किसान मानसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने की स्थिति में सिंचाई और जल उपलब्धता को लेकर भी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियां मानसून के पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, आने वाले हफ्तों में बारिश की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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