बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टरों ने खत्म की हड़ताल, ओपीडी सेवाएं सामान्य होंगी
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली। हालांकि, होम्योपैथ डॉक्टरों के पंजीकरण और सीसीएमपी कोर्स के विरोध को जारी रखने की बात कही।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टरों ने गुरुवार को अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। डॉक्टरों ने कहा कि अदालत के निर्देश और अपील का सम्मान करते हुए तत्काल प्रभाव से आंदोलन समाप्त किया जा रहा है।
महाराष्ट्र सेंट्रल एमएआरडी के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे, आईएमए महाराष्ट्र के कोषाध्यक्ष डॉ. अमोल गिते और बीएमसी एमएआरडी की अध्यक्ष डॉ. रुतुजा राउत ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया है।
हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए सीसीएमपी (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी-सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी) कोर्स और इससे जुड़े सरकारी फैसले का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति एमएआरडी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और अन्य संबंधित संगठनों से चर्चा के बाद तय की जाएगी।
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डॉक्टरों ने बताया कि अब राज्य के अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होंगी। इसमें ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं और ऑपरेशन थिएटर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान भी आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया और मरीजों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
इससे पहले गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदर्शन कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल काम पर लौटने का निर्देश दिया था। दो सदस्यीय पीठ ने कहा था कि यदि डॉक्टर काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो उनका वेतन रोका जा सकता है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर आंदोलन करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों की मांगों को सुना जाएगा, लेकिन मरीजों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
एमएआरडी ने 5 अगस्त की आधी रात से महाराष्ट्र के 32 सरकारी अस्पतालों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। बाद में मुंबई और ठाणे के नगर निगम अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर भी इसमें शामिल हो गए थे।
डॉक्टर महाराष्ट्र सरकार के 30 जून के उस फैसले का विरोध कर रहे थे, जिसमें होम्योपैथ डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने और एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया था। डॉक्टरों ने इस प्रक्रिया को अंतिम न्यायिक फैसले तक रोकने की मांग की है।
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