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भारतीय गणितज्ञ महेश काकड़े को 2026 का रामानुजन पुरस्कार, बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में योगदान के लिए सम्मान

भारतीय गणितज्ञ महेश काकड़े को बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2026 का रामानुजन पुरस्कार मिला है। उन्होंने कई जटिल गणितीय समस्याओं पर शोध किया है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के गणितज्ञ प्रोफेसर महेश रमेश काकड़े को विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित रामानुजन पुरस्कार प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में महत्वपूर्ण और मौलिक योगदान के लिए दिया गया है। यह पुरस्कार सैद्धांतिक भौतिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीटीपी) और अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ (आईएमयू) की ओर से दिया जाता है।

महेश काकड़े आईआईएससी के गणित विभाग में प्रोफेसर हैं। वह 2019 में संस्थान से जुड़े। इससे पहले उन्होंने ब्रिटेन में कई वर्षों तक शोध और अध्यापन किया था।

काकड़े ने बेंगलुरु स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान से गणित में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और शुद्ध गणित में पीएचडी पूरी की। वर्ष 2008 में डॉक्टरेट पूरी करने के बाद उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन में शोध एवं अकादमिक भूमिकाएं निभाईं।

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आईआईएससी में उनका मुख्य शोध क्षेत्र बीजगणितीय संख्या सिद्धांत है। इसके अलावा उन्होंने अंकगणितीय ज्यामिति और गैर-संवृत इवासावा सिद्धांत पर भी काम किया है। बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में बीजगणित के माध्यम से संख्याओं, समीकरणों और उनके बीच मौजूद जटिल संबंधों का अध्ययन किया जाता है।

काकड़े के शोध ने ग्रॉस-स्टार्क और ब्रूमर-स्टार्क अनुमानों जैसे महत्वपूर्ण गणितीय प्रश्नों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उनका काम गणितज्ञ डेविड हिल्बर्ट की 1900 में प्रस्तुत 23 प्रसिद्ध समस्याओं में से 12वीं समस्या से भी जुड़ा है।

उन्हें इससे पहले 2022 में इंफोसिस पुरस्कार, 2023 में व्हाइटहेड पुरस्कार मिल चुका है। वह भारतीय विज्ञान अकादमी के फेलो भी हैं और आईआईएससी में होमी भाभा चेयर संभाल चुके हैं। उन्हें स्वर्णजयंती फेलोशिप समेत कई शोध फेलोशिप भी मिली हैं।

रामानुजन पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के विकासशील देशों के उन गणितज्ञों को दिया जाता है, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उल्लेखनीय शोध किया हो। पुरस्कार में करीब 10,000 अमेरिकी डॉलर की राशि भी शामिल है।

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