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ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग पर लगाया राजनीतिक पक्षपाती होने का आरोप, कहा- तुग़लक़ी आयोग बन चुका है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने और एआई द्वारा मतदाता नाम हटाने का आरोप लगाया, इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चुनाव आयोग को "तुग़लकी आयोग" करार देते हुए कहा कि यह आयोग अब राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। ममता ने आरोप लगाया, "चुनाव आयोग अब एक 'तुग़लकी आयोग' बन चुका है, जिसे एक राजनीतिक पार्टी चला रही है। चुनाव आयोग आम नागरिकों को आतंकवादियों की तरह मान रहा है... भाजपा के निर्देश पर, चुनाव आयोग बंगाल के मतदाताओं के नाम हटाने का काम कर रहा है।" यहाँ ममता ने 'तुग़लकी' शब्द का उपयोग दिल्ली के सुलतान मोहम्मद बिन तुगलक के निर्णयों की आलोचना करते हुए किया, जिन्हें उनकी मनमानी निर्णयों के लिए जाना जाता था।

यह आरोप पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच उठाया गया है, जहाँ राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लागू किया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनावी प्रक्रिया में मतदाता नामों को हटाने के लिए किया जा रहा है, जिसके कारण आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है।

ममता ने यह भी दावा किया कि भाजपा आईटी सेल की एक महिला अधिकारी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपकरणों का इस्तेमाल कर बंगाल के 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहा है। ममता ने कहा, "चुनाव आयोग बंगाल के मतदाताओं को निशाना बना रहा है और लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।"

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ममता ने चुनाव आयोग द्वारा निलंबित किए गए सात सहायक चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारियों का समर्थन करते हुए कहा, "अगर बंगाल सरकार के अधिकारियों को सताया जाता है, तो हम उन्हें पूरी तरह से सुरक्षा देंगे और जिन्हें पदावनत किया जाएगा, उन्हें हम प्रोत्साहित करेंगे।"

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