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ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद दिल्ली में हिरासत में, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग

ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद दिल्ली में हिरासत में लिए गए। विपक्ष एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी को दिल्ली में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ पार्टी के तीन सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, प्रतिमा मंडल और डोला सेन को भी हिरासत में लिया गया। ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने हिरासत में लिए जाने से पहले दिल्ली के साउथ एवेन्यू इलाके में एक बस स्टैंड के पास धरना दिया। यह घटनाक्रम चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष तथा निर्वाचन आयोग के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच सामने आया है।

एसआईआर के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहा है विपक्ष?

तृणमूल कांग्रेस का यह प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ विपक्षी दलों के व्यापक अभियान का हिस्सा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।

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विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। विपक्षी दल मतदाता सूची से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए निर्वाचन आयोग से मुलाकात करना चाहते हैं।

दिल्ली में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन

इससे पहले 6 अक्टूबर को ‘INDIA’ गठबंधन के सांसदों ने संसद से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। दिल्ली पुलिस ने मार्च रोक दिया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। इनमें तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन भी शामिल थे।

रिपोर्टों के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें 10 सांसद शामिल थे। बाद में आकाशवाणी भवन के पास राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की मांग करते हुए धरना दिया।

बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए अभियान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद जारी है और विपक्ष मतदाता सूची में बदलाव तथा निर्वाचन व्यवस्था की पारदर्शिता पर जवाब मांग रहा है।

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