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ममता बनर्जी की महिला योजनाओं ने कैसे तैयार किया मजबूत समर्थन आधार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की महिला केंद्रित योजनाओं ने शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के जरिए महिलाओं को मजबूत राजनीतिक समर्थन आधार में बदल दिया है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के एक दशक के शासन ने राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को व्यापक रूप से बदल दिया है। आज महिलाएं केवल मतदाता या समर्थक नहीं, बल्कि नीति निर्माण को प्रभावित करने वाली सामाजिक और आर्थिक शक्ति बनकर उभरी हैं।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने कई लक्षित योजनाएं शुरू कीं, जिनसे महिलाओं को कल्याणकारी लाभार्थी से आगे बढ़ाकर राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त किया गया।

रूपश्री योजना के तहत विवाह के समय 22.02 लाख महिलाओं को 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इस योजना पर अब तक 5,558.66 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानजनक शुरुआत मिली है।

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कन्याश्री योजना ने बालिका शिक्षा को नई दिशा दी है। इसके तहत लगभग एक करोड़ छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए 16,554 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। यह योजना स्कूल छोड़ने की दर कम करने के सफल उदाहरण के रूप में देश-विदेश में सराही गई है।

आर्थिक मोर्चे पर भी महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर है और देश के 23.42 प्रतिशत महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई इसी राज्य में हैं।

‘मुक्तिर आलो योजना’ के तहत सामाजिक रूप से वंचित और पीड़ित महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2025 तक इस योजना पर 1.47 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इन पहलों ने महिलाओं को निर्णायक मतदाता और ममता बनर्जी का मजबूत समर्थन आधार बना दिया है।

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