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मंदाकिनी का रौद्र रूप शांत, पीछे छूटी तबाही की भयावह तस्वीर; चित्रकूट में घर, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त

मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटने के बाद चित्रकूट और सतना में बाढ़ से हुई तबाही सामने आ रही है। घरों में कीचड़, टूटी सड़कें, बिजली खंभे और पुल क्षतिग्रस्त हैं।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में बीते दो दिनों तक मंदाकिनी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया। नदी में करीब 30 फीट तक उफान आने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि अब नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आने लगा है और घाटों पर पानी का उफान भी कम हो गया है। इसके साथ ही बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीरें सामने आने लगी हैं।

चित्रकूट के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी घरों की पहली मंजिल तक पहुंच गया था। जान बचाने के लिए लोगों को अपने घर छोड़कर छतों पर शरण लेनी पड़ी। प्रशासन ने कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया। अब पानी उतरने के बाद घरों में कई फीट तक कीचड़ जमा है। सड़कें गाद, कचरे और मलबे से भर गई हैं। लोग खुद अपने घरों से पानी और कीचड़ निकालने में जुटे हैं।

बाढ़ के कारण बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जगह बिजली के खंभे टूटकर गिर गए हैं और अनेक इलाकों में दो दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों में लोग बिजली तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की बहाली का इंतजार कर रहे हैं।

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बाढ़ ने चित्रकूट के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी नुकसान पहुंचाया है। रामघाट पर बना पुल टूटकर मंदाकिनी नदी में गिर गया। वहीं तुलसीदास की प्रतिमा भी तेज बहाव की चपेट में आ गई और उसका कंधे के ऊपर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

राहत और बचाव अभियान के दौरान दो हेलिकॉप्टरों तथा सुरक्षा दलों की मदद से करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। पुलिस, होमगार्ड और नाव चालकों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई स्थानों पर जवानों ने बच्चों और बुजुर्गों को गोद में उठाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार सुबह चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों और राहत शिविरों का जायजा लिया तथा प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी कदम उठाएगी।

अब मंदाकिनी शांत हो रही है, लेकिन कीचड़ से भरे घर, टूटी सड़कें, उखड़े बिजली खंभे और क्षतिग्रस्त पुल बाढ़ की भयावहता की कहानी बता रहे हैं। प्रशासन के सामने अब राहत के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती है।

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