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मणिपुर के मुख्यमंत्री ने एससी किसानों को दुधारू पशु वितरित किए, डेयरी उत्पादन बढ़ाने पर जोर

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने एनईसी परियोजना के तहत अनुसूचित जाति किसानों को गर्भवती बछड़ियां वितरित कीं। सरकार का लक्ष्य डेयरी उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाना है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को उत्तर-पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा प्रायोजित परियोजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी) के किसानों को गर्भवती बछड़ियां वितरित कीं। इस पहल का उद्देश्य किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना और राज्य में डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देना है।

सरकार की इस परियोजना के तहत किसानों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवती बछड़ियां उपलब्ध कराने से किसानों को आने वाले समय में दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने लाभार्थी किसानों को पशुपालन के लिए आवश्यक देखभाल और बेहतर प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। डेयरी क्षेत्र ग्रामीण परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।

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उत्तर-पूर्वी परिषद की ओर से समर्थित इस परियोजना का उद्देश्य लक्षित किसान समुदायों को पशुधन उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि पशुपालन को कृषि गतिविधियों के साथ जोड़ने से किसानों को नियमित आय प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान लाभार्थी किसानों को परियोजना के तहत पशु सौंपे गए। अधिकारियों ने किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल से संबंधित आवश्यक जानकारी देने पर भी जोर दिया। गर्भवती पशुओं की विशेष देखभाल और नियमित पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता डेयरी उत्पादन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मणिपुर सरकार राज्य में कृषि और पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। इस परियोजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के किसानों को प्रत्यक्ष सहायता देने के साथ-साथ डेयरी उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों से किसानों की आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राज्य में दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। परियोजना के प्रभाव का आकलन किसानों की आय और डेयरी गतिविधियों में होने वाली वृद्धि के आधार पर किया जाएगा।

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