चंडीगढ़ में डॉक्टरों की तैनाती पर मनीष तिवारी ने उठाए सवाल, 221 में से 180 डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर होने का दावा
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ में डॉक्टरों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 221 में से लगभग 180 डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर हैं और संसद में अधूरी जानकारी दी गई।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को चंडीगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की तैनाती को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे लगभग 221 डॉक्टरों में से करीब 180 डॉक्टर प्रतिनियुक्ति (डिप्यूटेशन) पर दूसरे स्थानों से आए हुए हैं।
मनीष तिवारी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों का प्रतिनियुक्ति पर होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंताजनक हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शायद यही वजह है कि चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संसद में उनके सवाल का विस्तृत जवाब नहीं दिया।
लोकसभा में पूछे गए एक अनस्टार्ड प्रश्न के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्य सूची के विषय हैं। इसका मतलब है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना और डॉक्टरों के पद सृजित करना संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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मंत्रालय ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह सहायता राज्यों और यूटी द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर दी जाती है।
मनीष तिवारी ने संसद में दिए गए जवाब को “औपचारिक” और अधूरा बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई तो यह संसद की विशेषाधिकार से जुड़ा मामला बन सकता है।
तिवारी का कहना है कि चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश में डॉक्टरों की वास्तविक संख्या, स्थायी पदों और प्रतिनियुक्ति पर आए डॉक्टरों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। इससे ही स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है।