हमारी जरूरतों के अनुसार अपने नियम बनाना जरूरी: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत को बिजली क्षेत्र में अन्य देशों के नियम अपनाने के बजाय अपनी जरूरतों के अनुसार नियम बनाने चाहिए, ताकि उत्कृष्टता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि देश के लिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने नियम और विनियम तैयार करें, न कि अन्य देशों के नियमों को सीधे अपनाएं। उन्होंने यह बात सोमवार (19 जनवरी, 2026) को आईआईटी दिल्ली में ऊर्जा क्षेत्र में विनियामक मामलों के लिए स्थापित किए गए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) के उद्घाटन के अवसर पर कही।
मनोहर लाल ने कहा कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है। दुनिया के अन्य देश अपने-अपने नियम और कानून तय करते हैं और भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे देशों के नियमों को ज्यों का त्यों अपनाने के बजाय, भारत को अपनी सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। वे अपने नियम बनाएंगे और हम भी अपने नियम बनाएंगे। लेकिन यह आवश्यक है कि हम पूरी तरह से उनके नियमों को उधार लेने के बजाय, अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप नियम तैयार करें।”
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केंद्रीय मंत्री ने यह भी जोर दिया कि नियम और विनियम महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य केवल नियंत्रण तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे नियम वही होते हैं जो उत्कृष्टता को बढ़ावा दें, नवाचार को प्रोत्साहित करें और ऊर्जा क्षेत्र के समग्र विकास में सहायक बनें।
मनोहर लाल के अनुसार, मजबूत और व्यावहारिक विनियामक ढांचा न केवल बिजली क्षेत्र की दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि निवेश को आकर्षित करने, उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगा।
आईआईटी दिल्ली में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नीति निर्माण, शोध और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नियामक मुद्दों पर गहन अध्ययन, प्रशिक्षण और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ भारतीय संदर्भ में समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।